महराजगंज से उठी आवाज—‘कोरोना में जान जोखिम में डाली, अब अधिकार चाहिए’
महराजगंज: उत्तर प्रदेश में आशा कार्यकत्रियों और आशा संगिनियों ने अपने हक को लेकर अब खुलकर आवाज उठानी शुरू कर दी है। आशा कार्यकत्री एसोसिएशन उत्तर प्रदेश की ओर से मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें उनकी समस्याओं और मांगों को प्रमुखता से रखा गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि आशा कार्यकत्रियों ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर स्वास्थ्य सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाया। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर बच्चों के टीकाकरण तक, हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया गया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक स्थायी मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल सका है।
आशा बहनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और अस्थायी भुगतान के कारण उनका परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। सरकार द्वारा अन्य संविदा कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि की गई, लेकिन आशा कार्यकत्रियों को इस लाभ से वंचित रखा गया है।
मुख्य मांगें
आशा कार्यकत्रियों और संगिनियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
न्यूनतम ₹21,500 निश्चित मासिक मानदेय लागू किया जाए
10 लाख रुपये का बीमा कवर और प्रमाण पत्र दिया जाए
कार्य के दौरान मृत्यु होने पर आश्रितों को नौकरी दी जाए
बकाया प्रोत्साहन राशि और टीबी/अन्य योजनाओं का भुगतान जल्द किया जाए
प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना का कार्यभार पुनः आशा कार्यकत्रियों को दिया जाए
फिक्स वेतन/भत्ता व्यवस्था लागू की जाए
संघ की जिलाध्यक्ष जमीला निशा ने सरकार से मांग की है कि आशा कार्यकत्रियों के योगदान को देखते हुए उनकी सभी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाए, अन्यथा आंदोलन तेज किया जाएगा।



