सरकार द्वारा किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलाने के उद्देश्य से संचालित धान क्रय केंद्रों की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद के पनियरा साधन सहकारी समिति स्थित धान क्रय केंद्र पर किसानों ने भारी अनियमितता और खुले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सरकारी व्यवस्था की मंशा पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
किसानों का आरोप है कि जहां वास्तविक किसानों को बोरे की कमी, गोदाम में जगह न होने जैसे बहाने बनाकर बार-बार लौटाया जा रहा है, वहीं गल्ला व्यापारियों का धान बिना किसी बाधा के तौला जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि क्रय केंद्र पर नियमों को दरकिनार कर निजी व्यापारियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
नमी के नाम पर अवैध कटौती
धान तौल के दौरान किसानों से नमी और गुणवत्ता का हवाला देकर प्रति कुंतल कई किलो की अवैध कटौती किए जाने का भी आरोप है। किसानों का कहना है कि जब वे इसका विरोध करते हैं तो उन्हें अगली तारीख देकर टाल दिया जाता है, जिससे वे मजबूर होकर चुप रहने को विवश हो जाते हैं।
कागजों में खरीद, जमीन पर सच्चाई अलग
पनियरा और आसपास के गांवों के किसानों ने दावा किया कि कई बार क्रय केंद्र के चक्कर लगाने के बावजूद उनका धान नहीं खरीदा गया, जबकि रिकॉर्ड में हजारों कुंतल धान की खरीद दर्शा दी गई। आरोप है कि गोदाम की सीमित क्षमता के बावजूद बड़े पैमाने पर फर्जी तौल दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।
कुछ किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय अंगूठा लगवाकर कागजी तौल दर्शाई गई, जिससे पूरे मामले में सुनियोजित फर्जीवाड़े की आशंका और गहरी हो गई है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
पीड़ित किसानों ने शासन और जिला प्रशासन से उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी धान क्रय व्यवस्था से किसानों का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।
किसानों ने मांग की है कि दोषी सचिव, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लूट और भ्रष्टाचार पर रोक लग सके और धान क्रय केंद्र अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा कर सके।