जनपद महराजगंज में पीसीएफ (प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन) द्वारा संचालित धान क्रय केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। धान खरीद में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार से त्रस्त किसानों की आवाज अब सीधे मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुँच गई है।शिकायतकर्ता विनोद तिवारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत, जिसका संदर्भ संख्या 40018726000686 है, में धान क्रय केंद्रों पर फैली अव्यवस्था की परत-दर-परत जानकारी सामने आई है।
शिकायत के अनुसार जिन किसानों का धान तौल लिया जा चुका है, उन्हें भुगतान के लिए हफ्तों तक अंगूठा लगाने के नाम पर क्रय केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। भुगतान की प्रक्रिया न सिर्फ धीमी है, बल्कि किसानों के लिए मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का कारण बनती जा रही है।
किसानों ने आरोप लगाया है कि क्रय केंद्रों पर बोरों की समय से आपूर्ति नहीं हो रही है। यदि बोरे भेजे भी जाते हैं, तो इतनी कम संख्या में कि एक किसान का पूरा धान एक बार में तौल पाना संभव नहीं होता। परिणामस्वरूप किसान बार-बार केंद्रों पर आने को मजबूर हैं।
शिकायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया है कि पीसीएफ के जिला प्रबंधक राइस मिलरों के प्रभाव में कार्य कर रहे हैं। राइस मिलरों को प्राथमिकता के आधार पर बोरे उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि सरकारी क्रय केंद्रों पर केवल दिखावटी खरीद की जा रही है।
शिकायत कर्ता विनोद तिवारी के हवाले से यह भी कहा है कि कई स्थानों पर बिना वास्तविक तौल के ही किसानों से अंगूठा लगवाया जा रहा है। बाद में राइस मिलरों से सांठगांठ कर ट्रकों की फर्जी लोडिंग दर्शाकर खाली वाहन वापस भेज दिए जाते हैं, जिससे वास्तव में खरीदा गया धान केंद्रों पर ही जमा रहता है।
धान की लोडिंग न होने के कारण अधिकांश क्रय केंद्र पूरी तरह भर चुके हैं, जिससे नए किसानों का धान तौलना संभव नहीं हो पा रहा है। क्रय केंद्र संचालक भी असहाय स्थिति में हैं और खरीदे गए धान की लोडिंग का इंतजार करते-करते किसानों को टालने पर मजबूर हैं।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस गंभीर समस्या के बावजूद न तो पीसीएफ के जिला प्रबंधक किसानों से संवाद कर रहे हैं और न ही डिप्टी आरएम उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुन रहे हैं। पूरी व्यवस्था किसान विरोधी नजर आ रही है, जिससे अन्नदाता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। शिकायत कर्ता विनोद तिवारी ने शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकार की कथनी और करनी में अंतर न दिखे और किसानों को वास्तविक न्याय मिल सके