घुघुली–आनंदनगर नई रेल लाइन परियोजना के भूमि अधिग्रहण में बड़ा घोटाला सामने आया है। अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर 42 लाख रुपए की संगठित ठगी का पर्दाफाश हुआ है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
एडीएम न्यायिक की जांच रिपोर्ट में यह पुष्ट हुआ है कि हल्का लेखपाल, भू-अध्यापति कार्यालय का बाबू और एक अन्य व्यक्ति ने मिलकर यह पूरी साजिश रची थी।
पीड़ित पकड़ी नौनिया निवासी के अनुसार अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर उनसे तीन चेकों के जरिए 42 लाख रुपए की भारी-भरकम रकम ली गई। यह रकम शहर के एक क्लीनिक पर लेखपाल और बाबू को सौंपी गई थी, जिसे तुरन्त एक व्यक्ति के खाते में जमा कर तुरंत निकाल लिया गया।
जब पीड़ित ने रकम वापस मांगनी चाही तो आरोपी उसे धमकाने लगे। पीड़ित द्वारा प्रस्तुत बैंक स्टेटमेंट और प्रमाणों ने पूरे ठगी खेल का भंडाफोड़ कर दिया।
जांच में दोषी पाए जाने पर एडीएम न्यायिक ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति कर दी है। रिपोर्ट जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचते ही प्रशासनिक हलचल बढ़ गई है।
जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। संकेत साफ हैं कि जल्द ही पुलिसिया कार्रवाई, निलंबन और विभागीय कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
इस घटना ने भू-अध्यापति कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।वहीं पीड़ित ने मांग की है कि उसकी पूरी रकम वापस दिलाई जाए और आरोपियों पर कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जाए।सूत्रों के मुताबिक, भू-अध्यापति कार्यालय में कई अन्य मामलों में भी पैसे लेने की शिकायतें सामने आने की संभावना है। एक अन्य किसान ने भी आरोप लगाया है कि बासपार बैजौली के एक बाबू ने उससे भी पैसे लिए हैं और वह जल्द ही जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाएगा।
अब निगाहें डीएम कार्यालय पर टिकी हैं कि आगे इस बड़े घोटाले में क्या कार्रवाई होती है